पुराने नियम में “यहोवा के दूत” का पहला परिचय हाजिरा के भागने की घटना में मिलता है (उत्पत्ति 16:6–13)। बाइबल में अनेक स्वर्गदूतों का वर्णन है, परंतु यह दूत कोई साधारण स्वर्गदूत नहीं है। साधारण स्वर्गदूत न तो कभी स्वयं को परमेश्वर घोषित करते हैं, न ही वचन उन्हें ऐसा कहता है, और न ही वे ईश्वरीय महिमा स्वीकार करते हैं।
इसके विपरीत, यहोवा का दूत स्वयं परमेश्वर के अधिकार से बोलता है, लोग उसे परमेश्वर मानकर दंडवत करते हैं, और पवित्र शास्त्र भी उसे “यहोवा” व “परमेश्वर” कहकर पुकारता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वह स्वयं परमेश्वर—प्रभु यीशु मसीह—हैं, जो पिता के साथ “यहोवा” नाम के भागीदार हैं।
इस लेख में हम पहले उन वचनों को देखेंगे जो यहोवा के दूत को परमेश्वर सिद्ध करते हैं, फिर इस पर उठने वाले विरोधी तर्कों का उत्तर देंगे, और अंत में प्रमाणित करेंगे कि यहोवा का यह दूत स्वयं प्रभु यीशु मसीह ही हैं।
विषय-सूची
यहोवा का दूत परमेश्वर यहोवा है
यहोवा का दूत ही परमेश्वर यहोवा है — इस बाइबलीय शिक्षा के विरुद्ध उठाई जाने वाली आपत्तियाँ
यहोवा का दूत प्रभु यीशु मसीह ही हैं
पुराने नियम में “यहोवा के दूत” के रूप में वर्णित एक दूत का परिचय हमें सबसे पहले तब मिलता है, जब हाजिरा अपनी स्वामिनी सारै के पास से भाग जाती है (उत्पत्ति 16:6-13)। पवित्र बाइबल में हमें स्वर्गदूतों का उल्लेख बहुत से स्थानों पर मिलता है। परंतु यह यहोवा कोई साधारण स्वर्गदूत नहीं है। ऐसा इसलिए, क्योंकि साधारण स्वर्गदूत कहीं भी स्वयं को परमेश्वर या यहोवा घोषित नहीं करते। पवित्र शास्त्र में भी उन्हें कभी परमेश्वर या यहोवा नहीं लिखा जाता; यदि ऐसा लिखा जाए तो वह ईश-निंदा (देवदूषण) होगी। ठीक उसी तरह, वे परमेश्वर को मिलने वाली महिमा और आराधना को भी कभी ग्रहण नहीं करते (इस विषय पर हम अंत में विस्तार से चर्चा करेंगे)। परंतु यहोवा का दूत हर एक प्रसंग में स्वयं परमेश्वर की तरह बात करता है, भक्तजन उसे साक्षात परमेश्वर मानते हैं, और पवित्र शास्त्र भी उसे परमेश्वर और यहोवा कहकर संबोधित करता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वह स्वयं परमेश्वर है, और पिता के साथ-साथ “यहोवा” नाम को धारण करने वाले हमारे प्रभु यीशु मसीह ही हैं। इस सच्चाई को आपको भली-भाँति समझाने के लिए, सबसे पहले मैं वे वचन प्रस्तुत करूँगा जहाँ स्पष्ट रूप से लिखा है कि यहोवा का दूत ही परमेश्वर है; इसके बाद, इस पर कुछ लोगों द्वारा उठाई जाने वाली विरोधी दलीलों और भ्रांतियों का उत्तर दूँगा; और अंत में यह पूरी तरह सिद्ध करूँगा कि वह प्रभु यीशु मसीह ही हैं।
1. यहोवा का दूत परमेश्वर यहोवा है
उत्पत्ति 16:7-10 में यहोवा का दूत जंगल में जल के सोते के पास, अर्थात् शूर के मार्ग पर स्थित सोते के पास हाजिरा को मिलता है और पूछता है कि हे सारै की दासी हाजिरा, तू कहाँ से आई है और कहाँ जा रही है? जब हाजिरा कहती है कि मैं अपनी स्वामिनी सारै के पास से भाग रही हूँ, तब यहोवा का दूत उससे कहता है कि अपनी स्वामिनी के पास लौट जा और उसके अधीन रह। साथ ही, यहोवा का दूत उससे यह प्रतिज्ञा करता है कि मैं तेरे वंश को निश्चय ही इतना बढ़ाऊँगा कि बहुतायत के कारण उसकी गिनती नहीं हो सकेगी। इस प्रसंग में ध्यान देने योग्य बात यह है कि ऐसा वादा केवल परमेश्वर ही कर सकता है, क्योंकि वंश को बढ़ाने वाला केवल वही है (व्यवस्थाविवरण 1:10)। इस आधार पर वह स्वयं को यहाँ साक्षात परमेश्वर के रूप में प्रकट करता है। केवल वही स्वयं को ऐसा नहीं दिखाता, बल्कि हाजिरा ने भी उसे कैसे पहचाना, यह उत्पत्ति 16:13 में देखा जा सकता है। वहाँ हाजिरा ने बात करने वाले यहोवा का नाम “अत्ता-एल-रोई” (तू देखने वाला परमेश्वर है) रखा, क्योंकि उसने सोचा कि क्या मैंने यहाँ भी उसे देखा जो मेरी सुधि लेता है? यहाँ हाजिरा ने पूरी तरह पहचान लिया कि जो व्यक्ति यहोवा के दूत के रूप में प्रकट हुआ, वह परमेश्वर ही था। केवल हाजिरा ही उसे परमेश्वर नहीं कह रही, बल्कि पवित्र आत्मा की प्रेरणा से इस ऐतिहासिक वृत्तांत को लिखने वाले मूसा भी यह स्पष्ट पुष्टि करते हैं कि बात करने वाला वह दूत स्वयं यहोवा ही था।
इसके बाद उत्पत्ति 21:17-18 में जब परमेश्वर ने बालक इश्माएल का रोना सुना, तब परमेश्वर के दूत ने स्वर्ग से हाजिरा को पुकार कर कहा कि हे हाजिरा, तुझे क्या हुआ? मत डर, क्योंकि जहाँ बालक है वहाँ से परमेश्वर ने उसकी आवाज सुन ली है; उठ, बालक को सम्भाल, क्योंकि मैं उसके द्वारा एक बड़ी जाति बनाऊँगा। यहाँ यहोवा का दूत हाजिरा को फिर से दर्शन देकर इश्माएल के विषय में पूर्व में की गई अपनी ही प्रतिज्ञा को याद दिलाता है।
अब आइए उस प्रसंग को देखें जब वह इब्राहीम के सामने प्रकट हुआ (उत्पत्ति 22:10-14)। जब इब्राहीम ने अपने पुत्र इसहाक की बलि चढ़ाने के लिए हाथ बढ़ाकर छुरी उठाई, तब यहोवा के दूत ने स्वर्ग से पुकारा: “हे इब्राहीम, हे इब्राहीम!” जब इब्राहीम ने उत्तर दिया, तो उसने कहा कि उस बालक पर हाथ मत बढ़ा और न उससे कुछ कर; क्योंकि तूने जो अपने इकलौते पुत्र को मुझसे नहीं रख छोड़ा, इससे मैं जान गया कि तू परमेश्वर का भय मानता है। इब्राहीम ने जब आँखें उठाकर देखा, तो झाड़ी में फँसा हुआ एक मेढ़ा दिखाई दिया, जिसे उसने अपने पुत्र के स्थान पर होमबलि चढ़ाया। इब्राहीम ने उस स्थान का नाम “यहोवा-यिरे” रखा, जिसके कारण आज तक कहा जाता है कि यहोवा के पर्वत पर उपाय किया जाएगा। यहाँ ध्यान दीजिए कि जब इब्राहीम इसहाक को अर्पित करने जा रहा था, तो वह परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार ऐसा कर रहा था (उत्पत्ति 22:1-2); परंतु यहाँ यहोवा का दूत कहता है कि तूने अपने पुत्र को “मुझसे” नहीं रख छोड़ा, जिससे वह स्पष्ट घोषणा करता है कि जिस परमेश्वर ने आज्ञा दी थी, वह मैं ही हूँ। इब्राहीम द्वारा उस स्थान का नाम यहोवा-यिरे रखना इस बात की दोबारा पुष्टि करता है कि प्रकट होने वाला यहोवा का दूत वास्तव में यहोवा ही था। ठीक वैसे ही जैसे उसने हाजिरा से प्रतिज्ञा की थी, उत्पत्ति 22:15-18 में यहोवा के दूत ने दूसरी बार स्वर्ग से इब्राहीम को पुकार कर अपनी ही शपथ खाते हुए कहा कि तूने अपने इकलौते पुत्र को नहीं रख छोड़ा, इसलिए मैं निश्चय ही तुझे आशीष दूँगा और तेरे वंश को आकाश के तारों और समुद्र के किनारे के बालू के कणों के समान अनगिनत बढ़ाऊँगा, और तेरा वंश शत्रुओं के नगरों का अधिकारी होगा। इब्राहीम और इसहाक के वंश को बढ़ाने वाला केवल परमेश्वर यहोवा ही है (व्यवस्थाविवरण 1:10)।
पुराने नियम के वचनों का जब हम गहराई से अध्ययन करते हैं, तो समझ आता है कि पिता यहोवा के साथ-साथ एक अन्य व्यक्ति भी उसी “यहोवा” नाम को धारण करता है। उदाहरण के लिए उत्पत्ति 19:24 को देखें, जहाँ लिखा है कि तब यहोवा ने सदोम और अमोरा पर आकाश से यहोवा के पास से गंधक और आग बरसाई। यहाँ स्पष्ट लिखा है कि एक यहोवा ने स्वर्ग में उपस्थित दूसरे यहोवा के पास से आग और गंधक बरसाकर उन नगरों का नाश किया। इसी घटना के विषय में आमोस 4:11 में स्वयं यहोवा कहता है: “जैसे परमेश्वर ने सदोम और अमोरा को उलट दिया था, वैसे ही मैंने तुम में से कितनों को उलट दिया और तुम आग से निकाली हुई लकड़ी के समान बचे; तौभी तुम मेरी ओर न फिरे, यहोवा की यही वाणी है।” यहाँ बोलने वाला यहोवा अंत में कहता है कि यह यहोवा की वाणी है; यदि यह बोलने वाला कोई नबी होता, तो वह यह कैसे कह सकता था कि तुम मेरी ओर न फिरे और मैंने तुम्हें नाश किया?
जब हम उत्पत्ति 18 और 19 अध्याय के इतिहास को देखते हैं, तो पाते हैं कि सबसे पहले इब्राहीम के पास तीन व्यक्ति प्रकट होते हैं। उन तीनों में से इब्राहीम केवल एक को “प्रभु” कहकर आदर देता है और उनका आतिथ्य सत्कार करता है। उन तीनों में से एक स्वयं यहोवा था और शेष दो साधारण स्वर्गदूत थे (उत्पत्ति 18:1-4)। भोजन के बाद वे दोनों स्वर्गदूत सदोम में लूत के घर की ओर चले जाते हैं (उत्पत्ति 18:16, 22; 19:1), परंतु यहोवा वहीं इब्राहीम के तंबू के निकट रुककर उससे संवाद करता है और बातचीत समाप्त होने पर वहाँ से जाता है (उत्पत्ति 18:16-33)। अगले दिन वही यहोवा सदोम और अमोरा के निकट पहुँचकर स्वर्गदूतों द्वारा नगर से बाहर निकाले गए लूत से बात करता है और ऊपर स्वर्ग में विद्यमान दूसरे यहोवा के पास से आग-गंधक बरसाकर उन नगरों को भस्म करता है (उत्पत्ति 19:17-25)।
(अतीत में किसी ने मुझसे प्रश्न किया था कि आप यह कैसे कह सकते हैं कि इब्राहीम के घर आया यहोवा ही सदोम गया, जबकि वह बातचीत के बाद चला गया था और यह घटना अगले दिन हुई? परंतु इब्राहीम के घर यहोवा के आने का दूसरा मुख्य कारण ही यह था कि वह इब्राहीम को बता सके कि वह सदोम और अमोरा का नाश करने जा रहा है—उत्पत्ति 18:17-21; ऐसी स्थिति में अगले दिन उन नगरों का नाश करने वाला वही यहोवा था।) इसके अनुसार, सदोम और अमोरा के विनाश के समय दो यहोवा उपस्थित थे, यह बात पवित्र शास्त्र साफ़ दिखाता है। इन दो ईश्वरीय व्यक्तियों का उल्लेख हमें यशायाह और जकर्याह की पुस्तकों में भी मिलता है, जिन्हें हम आगे देखेंगे। इस प्रकार इब्राहीम और हाजिरा के सामने वही यहोवा के दूत के रूप में प्रकट होकर बातें करता रहा, और पवित्र आत्मा की प्रेरणा से लेखकों ने उसे परमेश्वर कहा।
अब आइए देखें कि वह याकूब के सामने कैसे प्रकट हुआ। उत्पत्ति 31:10-13 में याकूब गवाही देता है कि झुंडों के गाभिन होने के समय जब उसने स्वप्न देखा, तो परमेश्वर के दूत ने उसे पुकार कर कहा कि आँखें उठाकर देख, सब बकरे धारीदार, चित्तीदार और धब्बेदार हैं, क्योंकि लाबान जो कुछ तेरे साथ कर रहा है वह मैंने देखा है; मैं बेतेल का वही ईश्वर हूँ जहाँ तूने खंभे पर तेल डाला और मुझसे मन्नत मानी थी, अब इस देश से निकलकर अपनी जन्मभूमि को लौट जा। अब प्रश्न उठता है कि बेतेल में याकूब को कौन प्रकट हुआ था—कोई दूत या स्वयं यहोवा? उत्पत्ति 28:11-18 के अनुसार, जब याकूब ने स्वप्न में स्वर्ग तक पहुँची हुई सीढ़ी देखी जिस पर स्वर्गदूत चढ़-उतर रहे थे, तब यहोवा उसके ऊपर खड़ा होकर बोला कि मैं तेरे दादा इब्राहीम और इसहाक का परमेश्वर यहोवा हूँ, जिस भूमि पर तू लेटा है वह मैं तुझे और तेरे वंश को दूँगा। जागने पर याकूब ने भयभीत होकर कहा कि निश्चय इस स्थान में यहोवा है, और उसने तकिए वाले पत्थर का खंभा बनाकर उस पर तेल उंडेला। अतः याकूब को स्वप्न में दर्शन देने वाला स्वयं यहोवा ही था। इसलिए उत्पत्ति 31 में जो परमेश्वर का दूत याकूब को अपने पिता के घर लौटने की आज्ञा देता है, वह वही है जो अतीत में बेतेल में यहोवा के रूप में प्रकट हुआ था। यहाँ ध्यान दें कि परमेश्वर का दूत और यहोवा का दूत दोनों एक ही हैं; कुछ स्थानों पर उसे केवल “दूत” भी कहा गया है।
उदाहरण के लिए उत्पत्ति 48:15-16 में जब याकूब यूसुफ के पुत्रों को आशीष देता है, तो कहता है कि वह परमेश्वर जिसके सम्मुख मेरे पूर्वज इब्राहीम और इसहाक चलते रहे, वह परमेश्वर जो मेरे जन्म से लेकर आज तक मेरा चरवाहा बना रहा, अर्थात् वह दूत जिसने मुझे सब बुराइयों से छुड़ाया है, वही इन बालकों को आशीष दे। यहाँ याकूब लाबान के घर दर्शन देने वाले परमेश्वर के दूत को, अर्थात् बेतेल में प्रकट हुए यहोवा को याद करते हुए उसे केवल “दूत” कहता है। इससे स्पष्ट है कि याकूब को प्रकट हुआ परमेश्वर का दूत और वह दूत एक ही व्यक्ति हैं।
अब यह सिद्ध करने के लिए कि यह दूत ही यहोवा का दूत है, निर्गमन 23:20-23 को देखें। वहाँ पिता यहोवा परमेश्वर कहता है कि सुन, मैं मार्ग में तेरी रक्षा करने और ठहराए हुए स्थान में पहुँचाने के लिए तेरे आगे-आगे एक दूत भेजता हूँ; उसके सम्मुख सावधान रहना, उसकी बात सुनना और उसका विरोध न करना, क्योंकि वह तुम्हारे अपराधों को क्षमा न करेगा, इसलिए कि उसमें मेरा नाम रहता है। यदि तू उसकी बात मानेगा, तो मैं तेरे शत्रुओं का शत्रु बनूँगा और मेरा दूत तेरे आगे चलकर कनानियों का संहार करेगा। याकूब ने अपनी मृत्यु के समय जिस दूत का स्मरण किया, उसी दूत के विषय में यहाँ पिता यहोवा बात कर रहा है। यहाँ सबसे मुख्य बात यह है कि उस दूत के पास परमेश्वर का नाम है, इसीलिए वह यहोवा कहलाता है। पिता के वचनों के अनुसार उसी दूत ने इस्राएलियों को मिस्र से छुड़ाकर कनान की ओर अगुवाई की।
अब न्यायियों 2:1-3 में देखें कि उस दूत के विषय में क्या लिखा है: “तब यहोवा का दूत गिलगाल से बोकीम को आया और कहने लगा कि मैं तुम्हें मिस्र से निकाल लाया और जिस देश की शपथ तुम्हारे पूर्वजों से खाई थी उसमें तुम्हें पहुँचाया, और मैंने कहा था कि अपनी वाचा को कभी न तोडूंगा; परंतु तुमने मेरी बात नहीं मानी।” पिता परमेश्वर ने जिस दूत को आगे भेजा था, वही यहाँ “यहोवा का दूत” कहलाया है। अतः यहोवा के रूप में प्रकट होने वाला परमेश्वर का दूत, दूत और यहोवा का दूत—तीनों एक ही हैं। यही बात निर्गमन 34:11-13 से भी प्रमाणित होती है, जहाँ यहोवा ने मूसा से कहा था कि कनानियों की वेदियों को ढा देना और उनसे वाचा न बांधना; न्यायियों 2 में यहोवा का दूत उन्हीं शब्दों को अपने कहे हुए शब्द बताता है कि मैंने तुम्हें आज्ञा दी थी कि उनकी वेदियों को तोड़ डालना, परंतु तुमने मेरी बात नहीं मानी।
आगे बढ़ते हुए निर्गमन 3:1-6 को देखें। जब मूसा होरेब पर्वत के पास अपने ससुर यित्रो की भेड़-बकरियाँ चरा रहा था, तब एक कँटीली झाड़ी के बीच आग की ज्वाला में यहोवा के दूत ने उसे दर्शन दिया। झाड़ी जल रही थी पर भस्म नहीं हो रही थी। जब मूसा यह कौतुक देखने मुड़ा, तो परमेश्वर ने झाड़ी के बीच से पुकारा: “हे मूसा, हे मूसा!” और कहा कि पास मत आ, अपनी जूतियाँ उतार ले क्योंकि जिस स्थान पर तू खड़ा है वह पवित्र भूमि है। फिर उसने कहा: “मैं तेरे पिता का परमेश्वर, इब्राहीम का परमेश्वर, इसहाक का परमेश्वर और याकूब का परमेश्वर हूँ।” तब मूसा ने अपना मुख ढाँप लिया क्योंकि वह परमेश्वर की ओर देखने से डरता था। यहाँ यहोवा का दूत मूसा के सामने प्रकट होकर स्वयं को परमेश्वर बताता है और पवित्र शास्त्र भी उसे यहोवा कहता है। मूसा ने अपने अंतिम दिनों में व्यवस्थाविवरण 33:16 में उसी प्रसंग का स्मरण करते हुए आशीष दी कि जो झाड़ी में रहता था, उसकी प्रसन्नता यूसुफ के सिर पर आए। वास्तव में उस प्रसंग में मूसा से यह कहने वाला कि “मैं जो हूँ सो हूँ, और इब्राहीम, इसहाक, याकूब का परमेश्वर यहोवा—यही सर्वदा मेरा स्मरणार्थ नाम है” (निर्गमन 3:14-15), स्वयं यही यहोवा का दूत था।
गिनती 22:31-35 में जब यहोवा ने बिलाम की आँखें खोलीं, तो उसने हाथ में नंगी तलवार लिए मार्ग में खड़े यहोवा के दूत को देखा और मुँह के बल गिरकर साष्टांग दंडवत किया। तब यहोवा के दूत ने उससे कहा कि तूने अपनी गदही को तीन बार क्यों मारा? देख, मैं ही तेरा विरोध करने निकला हूँ क्योंकि तेरी चाल मेरे सम्मुख टेढ़ी है। बिलाम ने पाप स्वीकार करते हुए कहा कि यदि यह बात तेरी दृष्टि में बुरी है तो मैं लौट जाता हूँ; तब यहोवा के दूत ने कहा कि तू इन पुरुषों के साथ जा, परंतु जो बात मैं तुझसे कहूँगा केवल वही कहना। यहाँ यहोवा का दूत परमेश्वर की भाँति अधिकार से बोलता है और बिलाम भी उसे परमेश्वर जानकर दंडवत करता है।
न्यायियों 6:11-22 में जब गिदोन मिद्यानियों के डर से दाख के कुंड में गेहूँ झाड़ रहा था, तब यहोवा का दूत ओप्रा के बांज वृक्ष के नीचे आकर बैठा और कहा कि हे शूरवीर, यहोवा तेरे संग है। वार्तालाप के दौरान शास्त्र कहता है कि तब यहोवा ने उसकी ओर देखकर कहा कि अपनी इसी शक्ति पर जा और इस्राएलियों को मिद्यानियों के हाथ से छुड़ा, क्या मैंने तुझे नहीं भेजा? जब गिदोन ने भेंट अर्पित करने की प्रार्थना की, तो दूत ने कहा कि मैं तेरे लौटने तक ठहरा रहूँगा। गिदोन ने जब मांस और अखमीरी रोटियाँ चट्टान पर रखीं, तो यहोवा के दूत ने अपनी लाठी के सिरे से उन्हें छुआ; चट्टान से आग निकली और भेंट भस्म हो गई, और यहोवा का दूत अंतर्धान हो गया। तब गिदोन ने जान लिया कि वह यहोवा का दूत था और घबराकर कहा: “हाय, प्रभु यहोवा! मैंने तो यहोवा के दूत को साक्षात देखा है!” तब यहोवा ने उससे कहा कि तुझे शांति मिले, मत डर, तू न मरेगा। यहाँ पहले यहोवा का दूत प्रकट होता है, फिर वही यहोवा के रूप में बात करता है, और उसे “परमेश्वर का दूत” भी कहा गया है। इससे पुनः सिद्ध होता है कि यहोवा का दूत, परमेश्वर का दूत और दूत एक ही हैं।
न्यायियों 13:19-22 में जब मानोह ने चट्टान पर मेमने की भेंट चढ़ाई, तो वेदी की ज्वाला में होकर यहोवा का दूत आकाश की ओर चढ़ गया। मानोह और उसकी पत्नी ने मुँह के बल गिरकर प्रणाम किया। तब मानोह ने जान लिया कि वह यहोवा का दूत था और अपनी पत्नी से भयभीत होकर कहा: “हम निश्चय मर जाएँगे, क्योंकि हमने परमेश्वर को देखा है।” मानोह समझ गया था कि जिसे उसने देखा वह स्वयं परमेश्वर था, और परमेश्वर को देखने के कारण वह मृत्यु के भय से काँप उठा। यहाँ भी उसे “दूत” और “यहोवा का दूत” दोनों कहा गया है।
1 इतिहास 21:15-19 में दाऊद के पाप के कारण जब विपत्ति आई, तो परमेश्वर ने यरूशलेम को नाश करने के लिए एक दूत भेजा। जब दाऊद ने आँखें उठाकर देखा, तो यहोवा का दूत हाथ में नंगी तलवार लिए पृथ्वी और आकाश के बीच खड़ा था। दाऊद और प्राचीनों ने टाट ओढ़कर साष्टांग प्रणाम किया और दाऊद ने परमेश्वर से गिड़गिड़ाकर प्रार्थना की कि हे मेरे परमेश्वर यहोवा, यह विपत्ति मुझ पर और मेरे घराने पर आए, इन भेड़ों पर नहीं। तब यहोवा के दूत ने गाद नबी को आज्ञा दी कि दाऊद से कह कि वह यबूसी ओर्नान के खलिहान में वेदी बनाए। 2 इतिहास 3:1 में इसी घटना का उल्लेख करते हुए लिखा है कि सुलैमान ने उस स्थान पर मंदिर बनाना आरंभ किया जहाँ दाऊद को यहोवा प्रकट हुआ था; और 2 शमूएल 24:16-19 में लिखा है कि दाऊद यहोवा की उस आज्ञा के अनुसार गया जो गाद ने दी थी। 2 शमूएल 24:16-17 में उसी व्यक्ति को “दूत” और “यहोवा का दूत” दोनों कहा गया है। इन समानांतर वचनों से स्पष्ट है कि दाऊद को दर्शन देने वाला और वेदी बनाने की आज्ञा देने वाला स्वयं यहोवा ही था। यद्यपि पुराने नियम में इस विषय पर और भी कई संदर्भ हैं, परंतु यहोवा का दूत ही परमेश्वर यहोवा है, यह पर्याप्त रूप से सिद्ध हो चुका है।
2. यहोवा का दूत ही परमेश्वर यहोवा है — इस बाइबलीय शिक्षा के विरुद्ध उठाई जाने वाली आपत्तियाँ
कुछ लोग यह तर्क देते हैं कि यहोवा का दूत वास्तव में परमेश्वर नहीं है, बल्कि भक्तों ने साधारण स्वर्गदूत को देखकर अज्ञानतावश परमेश्वर समझ लिया था, और चूँकि दूत के वचन परमेश्वर के थे इसलिए शास्त्र में उसे परमेश्वर लिख दिया गया। इसके समर्थन में वे प्रेरितों के काम 7:30 का हवाला देते हैं जहाँ स्तिफनुस ने कहा कि चालीस वर्ष बाद सीनै पहाड़ के जंगल में जलती झाड़ी की ज्वाला में एक स्वर्गदूत मूसा को दिखाई दिया। इसके आधार पर वे दावा करते हैं कि यहोवा का दूत केवल एक सामान्य स्वर्गदूत था।
अब आइए क्रम से इन आपत्तियों का उत्तर देखें। पहली बात यह है कि पुराने नियम के जिन भक्तों को यहोवा का दूत दिखाई दिया, उन्हें साधारण स्वर्गदूतों और इस ईश्वरीय दूत का अंतर बहुत अच्छी तरह पता था, जो उनके अपने शब्दों से प्रमाणित होता है। उत्पत्ति 32:1-2 में जब याकूब को मार्ग में स्वर्गदूत मिले, तो उसने उन्हें पहचानकर कहा कि यह तो परमेश्वर का दल (सेना) है और उस स्थान का नाम महनैम रखा। याकूब साधारण स्वर्गदूतों को पहचानता था, इसीलिए उसने उन्हें केवल सेना कहा; परंतु इसी याकूब ने स्वप्न में प्रकट होने वाले यहोवा के दूत को साक्षात परमेश्वर और यहोवा के रूप में पहचाना था (उत्पत्ति 31:10-13)।
न्यायियों 13:20-23 में संशोन के पिता मानोह को भी साधारण स्वर्गदूत और इस ईश्वरीय दूत का अंतर मालूम था। इसीलिए जब दूत वेदी की लौ में ऊपर चढ़ा, तो मानोह ने पहचान लिया कि वह यहोवा का दूत था और कहा कि हम निश्चय मर जाएँगे क्योंकि हमने परमेश्वर को देखा है। तब उसकी पत्नी ने उसे समझाया कि यदि यहोवा हमें मारना चाहता तो हमारी भेंट स्वीकार न करता। यदि वह केवल सामान्य स्वर्गदूत होता, तो मानोह को इस प्रकार मृत्यु का भय होने का कोई कारण नहीं था। यद्यपि नए नियम में जकरयाह (यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले के पिता) और मरियम भी दूत के प्रकट होने पर घबराए थे (लूका 1:11-12, 28-30), परंतु उनका भय मरने के कारण नहीं बल्कि दूत के संदेश के कारण था; जबकि पुराने नियम के ये भक्त इसलिए डरे क्योंकि उन्होंने जिस दूत को देखा वह साक्षात परमेश्वर था और परमेश्वर को देखकर कोई जीवित नहीं बच सकता। न्यायियों 6:22-23 में गिदोन ने भी जब कहा कि हाय प्रभु यहोवा, मैंने यहोवा के दूत को साक्षात देखा है, तब यहोवा ने स्वयं उसे ढाढ़स बंधाया कि मत डर, तू न मरेगा। यदि वह साधारण दूत होता, तो ऐसे आश्वासन की आवश्यकता न पड़ती। इससे स्पष्ट है कि पुराने नियम के भक्त साधारण दूतों और परमेश्वर के दूत के अंतर को भली-भाँति जानते थे।
यदि एक पल के लिए यह मान भी लें कि भक्तों को भ्रम हुआ था, तब भी उन घटनाओं को लिखने वाले पवित्र आत्मा से प्रेरित बाइबल के लेखकों ने भी स्पष्ट रूप से उस दूत को परमेश्वर और यहोवा ही लिखा है। यदि कोई कहे कि दूत के वचन परमेश्वर के थे इसलिए ऐसा लिखा गया, तो फिर बाकी स्थानों पर जहाँ साधारण स्वर्गदूत बोले, वहाँ लेखकों ने उन्हें परमेश्वर क्यों नहीं लिखा? जकरयाह, मरियम, प्रकाशितवाक्य के लेखक यूहन्ना, पतरस और कुरनेलियुस के सामने जब स्वर्गदूत आए, तो न तो लेखकों ने उन्हें परमेश्वर लिखा और न ही उन भक्तों ने उन्हें परमेश्वर समझा। क्या उन स्वर्गदूतों के वचन परमेश्वर के नहीं थे? पवित्र शास्त्र परमेश्वर का पद और नाम कभी किसी साधारण दूत को नहीं सौंप सकता, क्योंकि यह ईश-निंदा होगी।
अब देखें कि स्तिफनुस ने मूसा को दिखाई देने वाले दूत को “स्वर्गदूत” क्यों कहा (प्रेरितों के काम 7:30)। पहली बात यह है कि यहोवा का दूत स्वयं परमेश्वर होते हुए और यहोवा नाम धारण करते हुए भी, भक्तों के पास पिता का संदेश पहुँचाने के कारण “दूत” (संदेशवाहक) कहलाया, क्योंकि संदेश लाने वाले को दूत कहना सामान्य भाषा का नियम है। स्तिफनुस ने जब उसे स्वर्गदूत कहा, तो उसी प्रसंग में आगे (पद 31-34) उसने यह भी स्पष्ट लिखा कि प्रभु की यह वाणी सुनाई दी कि मैं तेरे पूर्वजों इब्राहीम, इसहाक और याकूब का परमेश्वर हूँ, और मूसा काँप उठा। निर्गमन 3 में जो हुआ, स्तिफनुस ने ठीक वही दोहराया। उस काल के यहूदी आदरवश “यहोवा” नाम का उच्चारण नहीं करते थे, बल्कि उसकी जगह “अदोनाई” (प्रभु) कहते थे; इसी कारण नए नियम में यहोवा के स्थान पर प्रभु और यहोवा के दूत के स्थान पर स्वर्गदूत शब्द आया। 1 राजा 19:5-8 में भी एलिय्याह को दर्शन देने वाले को पहले “दूत” और बाद में “यहोवा का दूत” कहा गया है। अतः केवल शब्दों के बाहरी प्रयोग से नहीं, बल्कि शास्त्र के पूरे संदर्भ और भक्तों की पहचान से समझना चाहिए कि वह कौन था। (यद्यपि कुछ स्थानों पर साधारण दूतों या याजकों को भी दूत कहा गया है, परंतु वे साधारण मनुष्य या सृजे हुए दूत हैं, यह संदर्भ से तुरंत समझ आ जाता है)।
दूसरी बात यह है कि यद्यपि यहोवा का दूत परमेश्वर था, फिर भी वह भक्तों के सम्मुख दूत या मनुष्य के रूप में प्रकट हुआ, इसलिए शास्त्र ने पहले उसके प्रकटीकरण के स्वरूप को बताया और फिर उसके परमेश्वर होने की पुष्टि की। उदाहरण के लिए उत्पत्ति 32:24-30 में याकूब से मल्लयुद्ध करने वाले को पहले “एक पुरुष” कहा गया, परंतु अंत में याकूब ने उस स्थान का नाम पनीएल रखकर कहा कि मैंने परमेश्वर को आमने-सामने देखा तौभी मेरा प्राण बच गया। होशे 12:3-5 इसी घटना की पुष्टि करता है कि याकूब परमेश्वर से लड़ा, वह दूत से लड़कर विजयी हुआ, और उसका स्मरणार्थ नाम सेनाओं का परमेश्वर यहोवा है। अतः वह परमेश्वर होते हुए भी मनुष्य और दूत के रूप में आया, इसलिए स्तिफनुस और एलिय्याह के प्रसंग में उसे स्वर्गदूत कहा गया, न कि इसलिए कि वह कोई सामान्य स्वर्गदूत था।
विरोधी एक और तर्क यह देते हैं कि पुराने नियम में लिखा है कि सीनै पर्वत पर व्यवस्था स्वयं यहोवा ने दी (निर्गमन 19-20, नेहेम्याह 9:13-14), परंतु नए नियम में लिखा है कि व्यवस्था स्वर्गदूतों के द्वारा दी गई (गलातियों 3:19, प्रेरितों 7:53, इब्रानियों 2:2)। इसके आधार पर वे कहते हैं कि जब व्यवस्था स्वर्गदूतों ने दी थी तब भी लोगों को समझाने के लिए परमेश्वर लिख दिया गया, उसी प्रकार यहोवा का दूत भी साधारण दूत था जिसे परमेश्वर लिख दिया गया। परंतु व्यवस्थाविवरण 33:2-4 को ध्यान से देखें, जहाँ मूसा लिखता है कि जब यहोवा सीनै से आया, तो वह लाखों पवित्र समूहों (स्वर्गदूतों) के मध्य में से आया और उसके दाहिने हाथ से ज्वालामय व्यवस्था निकली। भजन संहिता 68:17 भी कहता है कि परमेश्वर के रथ बीस हज़ार, वरन हज़ारों-हज़ार स्वर्गदूत हैं और प्रभु उनके बीच में है जैसे सीनै के पवित्र स्थान में। इससे स्पष्ट है कि जब परमेश्वर ने व्यवस्था दी, तो उनके साथ लाखों स्वर्गदूतों की सेना उपस्थित थी और वे उस कार्य में सहभागी थे; इसीलिए नए नियम में बहुवचन—“स्वर्गदूतों के द्वारा”—का प्रयोग हुआ है। यदि व्यवस्था देने वाला केवल एक ही साधारण दूत होता जिसे परमेश्वर लिख दिया गया, तो नए नियम में बहुवचन “स्वर्गदूतों” का प्रयोग कभी नहीं होता।
इसके आगे वे यह तर्क भी जोड़ते हैं कि नए नियम में लिखा है कि किसी ने कभी परमेश्वर को नहीं देखा और न उसकी आवाज सुनी, इसलिए मूसा को व्यवस्था देने वाले और पुराने नियम में प्रकट होने वाले केवल स्वर्गदूत ही थे। यूहन्ना 1:18 कहता है कि परमेश्वर को किसी ने कभी नहीं देखा, इकलौते पुत्र ने ही उसे प्रकट किया। परंतु यशायाह 6:1-3 में यशायाह ने प्रभु को ऊँचे सिंहासन पर देखा, दानिय्येल 7:9-10 में दानिय्येल ने अति प्राचीन को देखा, और यहेजकेल 1:26-28 में यहेजकेल ने सिंहासन पर मानव रूप में यहोवा के तेज का दर्शन पाया। तो फिर यूहन्ना 1:18 ऐसा क्यों कहता है? इसका कारण यह है कि पुराने नियम के नबियों के वे अनुभव केवल आत्मिक दर्शन और स्वप्न थे। यूहन्ना 1:18 का अर्थ यह है कि भौतिक रूप में साक्षात किसी ने परमेश्वर को नहीं देखा; परमेश्वर केवल देहधारी मसीह में ही पूर्ण रूप से प्रकट हुआ (यूहन्ना 1:14)। इसीलिए यीशु ने कहा कि जिसने मुझे देखा है उसने पिता को देखा है (यूहन्ना 14:9), और कुलुस्सियों 2:9 कहता है कि देवत्व की सारी परिपूर्णता मसीह में देह रूप में वास करती है।
1 तीमुथियुस 6:14-16 में प्रभु यीशु मसीह के विषय में लिखा है कि वह राजाओं का राजा और प्रभुओं का प्रभु है, जो अगम्य ज्योति में रहता है जिसे किसी मनुष्य ने न देखा और न कोई देख सकता है। परंतु मसीह के पुनरुत्थान और स्वर्गारोहण के बाद हनन्याह ने उन्हें देखा (प्रेरितों 9:10), पौलुस ने देखा (प्रेरितों 22:17), स्तिफनुस ने देखा (प्रेरितों 7:55) और यूहन्ना ने देखा (प्रकाशितवाक्य 1:13-16)। फिर पौलुस ऐसा क्यों कहता है कि कोई उन्हें नहीं देख सकता? क्योंकि इन सभी ने उन्हें दर्शनों में देखा, सीधे भौतिक रूप में नहीं। यूहन्ना को जब दर्शन हुआ तो मसीह के हाथ में सात तारे थे जो कलीसिया के दूतों के प्रतीक थे (प्रकाशितवाक्य 1:16, 20), और वे वध किए हुए मेमने के रूप में भी दिखे (प्रकाशितवाक्य 5:6)। इसी प्रकार पुराने नियम में भी पिता परमेश्वर को केवल दर्शनों और स्वप्नों में देखा गया, साक्षात देहधारी रूप में नहीं। मूसा ने भी केवल परमेश्वर की महिमा देखी और आवाज़ सुनी, उनका साक्षात रूप नहीं देखा। अतः यूहन्ना 1:18 से यह सिद्ध नहीं होता कि सीनै पर व्यवस्था देने वाले स्वर्गदूत थे।
यूहन्ना 5:37 में जब यीशु ने यहूदियों से कहा कि “तुमने कभी न उसका शब्द सुना और न उसका रूप देखा”, तो वे पुराने नियम के नबियों के दर्शनों की बात नहीं कर रहे थे, बल्कि यहूदियों के हृदय की उस कठोरता और अवज्ञा की बात कर रहे थे जो पीढ़ियों से परमेश्वर के स्वभाव और आज्ञाओं के प्रति चली आ रही थी। इसीलिए उन्होंने कहा कि जिस पिता ने मुझे भेजा उसी ने मेरी गवाही दी, परंतु तुमने न कभी उसका शब्द सुना न रूप देखा। यूहन्ना 8:19 में भी यीशु ने उन्हीं यहूदियों से कहा कि तुम न मुझे जानते हो और न मेरे पिता को। यदि वे पिता को नहीं जानते थे, तो मंदिर में किसकी उपासना करते थे? वे पिता की ही उपासना का दावा करते थे, परंतु यीशु का तात्पर्य उनकी आत्मिक अवज्ञा को दर्शाना था। अतः यह तर्क समाप्त हो जाता है कि पुराने नियम में बोलने वाला केवल दूत था।
अब इब्रानियों 2:1-4 के इस वाक्य को समझें कि “स्वर्गदूतों के द्वारा कहा गया वचन स्थिर रहा।” लेखक का उद्देश्य यह दिखाना है कि जब दूतों द्वारा कहे गए वचन का उल्लंघन करने वालों को उचित दंड मिला, तो प्रभु द्वारा आरंभ किए गए इतने बड़े उद्धार की उपेक्षा करके हम कैसे बच सकते हैं? यहाँ “स्वर्गदूतों द्वारा कहे गए वचन” के दो अर्थ हैं: पहला, व्यवस्था देते समय स्वर्गदूतों की सहभागिता थी; और दूसरा, बाइबल में “दूत” शब्द नबियों और याजकों के लिए भी प्रयुक्त हुआ है। उदाहरण के लिए हाग्गै 1:13 में नबी हाग्गै को “यहोवा का दूत” कहा गया है; मलाकी 3:1 में बपतिस्मा देने वाले यूहन्ना को “दूत” कहा गया है; मलाकी 2:7 में लिखा है कि याजक सेनाओं के यहोवा का दूत है; और 2 इतिहास 36:15-16 में लिखा है कि परमेश्वर अपने दूतों (नबियों) के द्वारा संदेश भेजता रहा, परंतु लोगों ने परमेश्वर के दूतों का उपहास किया और नबियों को सताया जिससे यहोवा का क्रोध भड़क उठा। नबी और याजक परमेश्वर की व्यवस्था सुनाते थे, और उनकी बात न मानने पर इस्राएलियों को दंड मिलता था। अतः पवित्र शास्त्र में कहीं भी साधारण स्वर्गदूतों को परमेश्वर या यहोवा नहीं कहा गया है।
3. यहोवा का दूत प्रभु यीशु मसीह ही हैं
निर्गमन 23:20-23 में पिता यहोवा ने जिस दूत के विषय में कहा था कि “मेरा नाम उसमें रहता है”, उसी के कारण वह यहोवा कहलाया। वही इस्राएलियों को मिस्र से कनान ले जाने वाला परमेश्वर था। भजन संहिता 78:18, 41 और भजन संहिता 106:14 के अनुसार जंगल की यात्रा में इस्राएलियों ने जिस परमेश्वर को परखा, उसी घटना का उल्लेख करते हुए प्रेरित पौलुस 1 कुरिन्थियों 10:8-9 में कहते हैं कि हम मसीह को न परखें, जैसा उनमें से कितनों ने परखा और साँपों द्वारा नाश किए गए। प्राचीन प्रतियों में यहाँ स्पष्ट रूप से “मसीह” शब्द आया है, जिससे सिद्ध होता है कि वह दूत त्रित्व के दूसरे व्यक्ति, प्रभु यीशु मसीह ही थे।
यूहन्ना 5:43 में प्रभु यीशु ने स्वयं गवाही दी कि “मैं अपने पिता के नाम से आया हूँ”, जो निर्गमन 23 में पिता द्वारा अपने दूत में अपना नाम रखने की बात से पूरी तरह मेल खाता है। मलाकी 3:1 में दो दूतों की भविष्यवाणी है: वचन के आरंभ में मार्ग तैयार करने वाला दूत बपतिस्मा देने वाला यूहन्ना है, और उसके बाद जिस “वाचा के दूत” का उल्लेख है जो अचानक अपने मंदिर में आएगा, वह स्वयं प्रभु यीशु मसीह हैं। यहाँ मसीह को दूत कहा गया है, जिससे पुनः सिद्ध होता है कि यहोवा का दूत प्रभु यीशु मसीह ही हैं।
जकर्याह 2:5-11 में बोलने वाला स्वयं को यहोवा कहता है (कि मैं उसके चारों ओर आग की शहरपनाह बनूँगा...) और कहता है कि सेनाओं के यहोवा ने मुझे भेजा है; और उस दिन बहुत सी अन्यजातियाँ यहोवा से मिल जाएँगी और मेरी प्रजा बनेंगी, और मैं तेरे बीच में वास करूँगा तब तू जानेगी कि सेनाओं के यहोवा ने मुझे तेरे पास भेजा है। हमारे बीच आकर देह में वास करने वाले (इब्रानियों 2:14-16, फिलिप्पियों 2:6-8) और अन्यजातियों को पिता की प्रजा बनाने वाले (प्रकाशितवाक्य 5:9-10) केवल प्रभु यीशु मसीह ही हैं।
यशायाह 48:11-17 में इस्राएल का पवित्र परमेश्वर यहोवा, जो आदि और अंत है तथा जिसने पृथ्वी की नींव डाली और आकाश को फैलाया, स्वयं कहता है कि आदि से लेकर अब तक मैंने कोई बात गुप्त में नहीं कही और “अब प्रभु यहोवा ने और उसकी आत्मा ने मुझे भेजा है।” पिता यहोवा की इच्छा के अनुसार (गलातियों 4:4, 1 यूहन्ना 4:9-10) और पवित्र आत्मा के सामर्थ्य से (लूका 1:35, यशायाह 11:1-2) इस पृथ्वी पर देहधारी होकर भेजा जाने वाला उद्धारकर्ता केवल प्रभु यीशु मसीह ही हैं।
यूहन्ना 1:18 जब कहता है कि “किसी ने कभी परमेश्वर को नहीं देखा; पिता की गोद में रहने वाले एकलौते पुत्र ने ही उसे प्रकट किया”, तो यह केवल नए नियम तक ही सीमित नहीं है। पुराने नियम में भी जब यहोवा के दूत ने देह में आकर उत्पत्ति 18 में इब्राहीम को दर्शन दिया, याकूब से मल्लयुद्ध किया, या मानोह को दर्शन दिया—तब भी उसी पुत्र के द्वारा उन्होंने पिता (परमेश्वर) को देखा। अदृश्य पिता को केवल पुत्र ने ही प्रकट किया, चाहे वह पुराने नियम में यहोवा के दूत के रूप में पूर्व-प्रकटीकरण (Christophany) हो या नए नियम में देहधारण। मीका 5:2 भी मसीह के विषय में गवाही देता है कि बेतलेहेम में जन्म लेने वाले शासक का निकास प्राचीन काल से, वरन अनादि काल से होता आया है।
अंत में, यह समझना भी आवश्यक है कि साधारण स्वर्गदूत परमेश्वर की महिमा कभी ग्रहण नहीं करते। प्रकाशितवाक्य 22:8-9 में जब यूहन्ना ने बातें दिखाने वाले स्वर्गदूत के पाँवों पर गिरकर प्रणाम करना चाहा, तो दूत ने तुरंत रोकते हुए कहा: “देख, ऐसा मत कर; मैं तेरा, तेरे नबी भाइयों का और इस पुस्तक की बातों को मानने वालों का संगी दास हूँ; परमेश्वर ही को दंडवत कर।” मत्ती 4:10 भी कहता है कि केवल प्रभु अपने परमेश्वर ही की उपासना कर। उत्पत्ति 19:1-2 में लूत द्वारा दो स्वर्गदूतों को झुककर प्रणाम करना केवल उस समय की संस्कृति के अनुसार अतिथियों का सामान्य सामाजिक आदर था। लूत को यह ज्ञात नहीं था कि वे स्वर्गदूत हैं (इब्रानियों 13:2); यदि उसे पता होता तो वह उन्हें बचाने के लिए अपनी बेटियों को सौंपने की बात कभी न करता (उत्पत्ति 19:5-9)। इसी प्रकार दानिय्येल 8:17-18 और 10:9-10 में दानिय्येल का गब्रिएल के सामने गिरना जानबूझकर की गई आराधना नहीं थी, बल्कि स्वर्गीय तेज के भय और घबराहट के कारण भारी नींद में अचेत होकर औंधे मुँह भूमि पर गिर पड़ना था, जिसके बाद दूत ने उसे हाथ पकड़कर उठाया।
इसके विपरीत, जब यहोवा के दूत के सामने इब्राहीम, यहोशू, गिदोन और मानोह ने दंडवत किया, तो उसने उन्हें कभी नहीं रोका—क्योंकि वह साक्षात आराधना के योग्य परमेश्वर है। पवित्र शास्त्र के संपूर्ण प्रमाणों से यह पूरी तरह स्पष्ट है कि पुराने नियम में प्रकट होने वाला “यहोवा का दूत” कोई और नहीं, बल्कि हमारे प्रभु यीशु मसीह ही हैं।